कोझीकोड में भाजपाः चिंतन से ज्यादा चिंता




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विक्रम उपाध्याय

अपने 36 साल के कार्यकाल में भाजपा ने चौथी बार केरल में राष्ट्रीय परिषद की बैठक की है। कालीकट या कोझीकोड भाजपा के लिए ऐतिहासिक महत्व का स्थान तो है ही अब रणनीतिक महत्व भी इसका बहुत है।

आने वाले दिनों मे पार्टी का जो भी विस्तार किया जाना है या होना है वह दक्षिण के राज्यों में ही संभव है।

उसमें भी केरल भाजपा के लिए बेहतर संभावनाओं वाला राज्य हैं पिछले चुनावों में हालांकि सीट के हिसाब से पार्टी को कोई बहुत कामयाबी नहीं मिली है, लेकिन वोट प्रतिशत लगभग दुगना हो गया है।

इसलिए कालीकट में भाजपा ने कांग्रेस के गरीबी हटाओ नारे को प्रतिस्थापित करने के लिए गरीब कल्याण कार्यक्रम का नारा दिया है। यह पंडित दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि है तो भाजपा की जरूरत भी है।

तीन दिन चली भाजपा कार्यकारिणी की इस बैठक में इन सभी मुद्दों पर खूब चिंतन मनन किया गया।

पाकिस्तान को हर तरफ से घेरने, सरकार की छवि गरीब-दलित समर्थक बनाने, मुसलमानों को अपने प्रति उदार बनाने और लोकसभा चुनाव के लिए दक्षिण विजय का अभियान शुरू करने के संकल्प के साथ कोझीकोड की यह बैठक संपन्न हुई।

केरल और कोझीकोड भाजपा के लिए बहुत ही ऐतिहासिक है।

पार्टी के लिए सबसे बड़े चिंतक व विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय को 15 साल महामंत्री के रूप में काम करने के बाद दिसंबर 1967 में इसी कोझीकोड में जनसंघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था।

अध्यक्ष बनने के बाद कालीकट का उनका भाषण आज भी अद्वितीय माना जाता है। मोदी सरकार वर्ष 2016 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशताब्दी वर्ष मना रही है, इसलिए कोझीकोड की इस बैठक का और महत्व हो जाता है।

किंतु पंडित जी के विचारों और उनके नाम पर सामाजिक समरसता के कार्यक्रमों को उरी हमले के कारण कम ही प्रमुखता मिल पाई।

चूंकि पूरे देश में पाकिस्तान को लेकर जबर्दस्त गुस्सा और उबाल था, इसलिए भाजपा और खुद प्रधानमंत्री को भी उरी और पाकिस्तान पर ही अपने को ज्यादा फोकस करना पड़ा।

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Pic: BJP press release

प्रधानमंत्री ने कार्यकारिणी की बैठक को ही पाकिस्तान को संदेश देने के लिए चुना और एक आम सभा के जरिये पाकिस्तान को युद्ध के लिए सावधान करते हुए गरीबी, बेरोजगारी दूर करने में प्रतिस्पर्धा की चुनौती दी और साथ में यह भी ऐलान किया कि भारत अब हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की आंतकसमर्थक नीतियों का भंडाफोड़ करेगा और दुनिया के मंच पर पाकिस्तान को अलग थलग कर देगा।

जाहिर है प्रधानमंत्री की इन बातों से अंतरराष्ट्रीय बिरादरी तो भारत के पक्ष में हुई ही देश के नागरिकों को भी एक बड़ा संतोष मिला साथ ही भाजपा के कार्यकर्त्ताओं का मनोबल तो उचा हुआ ही।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में भी पाकिस्तान और आंतकवाद का मुद्दा छाया रहा।

विशेषकर कश्मीर को लेकर पार्टी कोझीकोड से ऐसा संदेश देना चाहती थी जिसमें यह ध्वनि निकले कि राष्ट्रवाद की नीति में भाजपा के लिए कश्मीर एक महत्वपूर्ण अंग है और इसके लिए पार्टी कोई भी कुर्बानी देने के लिए तैयार है।

यह बात न सिर्फ भाजपा के प्रस्ताव में सामने रखी गई, बल्कि अमित शाह के भाषण में इसका खूब जिक्र हुआ। अमित शाह ने यहां तक कहा कि पाकिस्तान के साथ लड़ाई लंबी चलेगी और अंततः पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद नेस्तनाबूत हो जाएगा।

बाहरी दुनिया को संदेश देने साथ ही कोझीकोड में भाजपा ने अपने कोर मामले पर भी जबर्दस्त मंथन किया और पार्टी के सामने खड़ी चुनौतियों पर केरल यूनिट के साथ साथ दक्षिण की इकाइयों को भी झकझोरा गया।

अमित शाह ने इस बैठक में स्पष्ट किया कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पुनः बहुमत दिलाने की जिम्मेदारी दक्षिण के राज्यों की ही होगी।

क्योंकि उत्तरभारत में मिली जबर्दस्त सफलता को दुहराया नहीं जा सकता। राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में 2014 में जो सफलता मिली, उसे अगली बार बरकरार रखना बहुत बड़ी चुनौती होगी, इसलिए केरल, तमिलनाडू, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पार्टी को कम से कम 100 सीटें जीतनी होगी।

अमित शाह ने केरल की इकाई को कम से एक दर्जन लोकसभा सीट जिताने की तैयारी करने के लिए गंभीर ताकीद की। केरल मंे लोकसभा की 20 सीटें हैं।

हालांकि भाजपा ने केरल में तेजी से अपने जनाधार का विस्तार किया है, लेकिन चुनाव में सफलता के दृष्टिकोण से उसके पास सिर्फ एक विधानसभा की सीट है।

अमित शाह दक्षिण के राज्यों को सीधे अपने साथ जोड़ा है और उन्हें खूली छूट दी है कि जब चाहे वे अपनी बात बेधड़क उनके सामने रख सकते हैं।

कोझीकोड की बैठक में भाजपा ने सरकार की छवि गरीब व दलित समर्थक बनाने के लिए और प्रयास करने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद उन्हें शत शत नमन करते हुए कहा कि भाजपा उनके बताए रास्ते पर चलने को प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने न सिर्फ उनके अंतोदय विचारों का प्रतिपादन करने का आह्वान किया, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जरिये भारतीय मुसलमानों को भी पार्टी के प्रति उदार व नम्र करने की कोशिश की।

मोदी ने कहा कि पंडित जी कहा करते थे कि मुसलमानों को वोट की मंडी मत समझो, ना उन्हे तिरस्कृत करों न उन्हें पुरस्कृत करो।

मुसलमान देश के नागरिक हैं और उन्हें भी उसी सहजता और समरसता के साथ तरक्की का अवसर दिया जाना चाहिए जैसे बहुसंख्यक नागरिकों को प्राप्त है। प्रधानमंत्री की इस बात का मुस्लिमों में जबर्दस्त सकारात्मक प्रतिक्रिया हुई है।

1700 कार्यकारिणी सदस्यों समेत 2500 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति में भाजपा नेतृत्व ने एक सुर से यह संदेश प्रसारित किया कि भारत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बहुत तेजी से विकास कर रहा है और देश को पहली बार एक मजबूत, समझदार और दृढ़ प्रतिज्ञा वाला प्रधानमंत्री मिला है।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह और शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने जहां प्रधानमंत्री को हर परिस्थितियों में अडिग और दृढ इरादों वाला नेता बताया तो वहीं अरूण जेटली ने आर्थिक विकास का जबर्दस्त खांका खींचा।

लेकिन इस बैठक में अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के अलावा किसी और के भाषण को ना तो मीडिया में कोई प्रमुखता मिली और न बैठक में कोई विशेष चर्चा हुई।

केरल में भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक हो और संघ व पार्टी कार्यकताओं के दमन की चर्चा न हो यह संभव नहीं है।

कार्यक्रम के अंतिम दिन रविवार 25 सितंबर को प्रधानमंत्री ने विचारधारा की लड़ाई मंे बलिदान हुए लोगों की स्मृति में प्रकाशित एक पुस्तक आहुति का लोकापर्ण किया और मंच पर ही संघ के एक कार्यकर्त्ता की आपबिती सुनी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विचारधारा की लड़ाई हिंसक कैसे हो सकती है।

उन्होंने आहुति पुस्तक सबको पढ़ने की अपील करते हुए कहा कि संघ और भाजपा को इस लड़ाई में डटकर मुकाबला करना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि पिछले कई दशकों से भाजपा संघ के कार्यकर्ताओं पर वामपंथी विचारधारा के लोग हमले करते आ रहे हैं। आकड़ा है कि लड़ाई में संघ और भाजपा से जुड़े 1200 लोगों की हत्या हो चुकी है।

विक्रम उपाध्याय बिग वायर हिंदी के संपादक हैं

विक्रम उपाध्याय बिग वायर हिंदी के संपादक हैं