क्या है राष्ट्रीय नागरिक पंजी !

 

एनआरसी यानी राष्ट्रीय नागरिक पंजी। इसमे उन व्यक्तियों के नाम हैं जो इस देश के नागरिक हैं। इसे वर्ष 1951 की जनगणना के बाद तत्काल तैयार किया गया था। इसे जनगणना के दौरान वर्णित सभी व्यक्तियों के विवरणों के आधार पर तैयार किया गया था।

सिटिजनशिप एक्ट 1955 के सेक्शन 14ए में 2004 में संशोधन किया गया, जिसके तहत हर नागरिक के लिए अपने आप को नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस यानी एनआरसी में रजिस्टर्ड कराना अनिवार्य है।

असम और मेघालय को छोड़कर पूरे देश के लिए पॉपुलेशन रजिस्टर को नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर कहा जाता है जिसे  

2015-16 में अपडेट किया गया था। इसके लिए आंकड़े 2011 की जनगणना के साथ ही जुटाए गए थे।

असम पहला भारतीय राज्य है जहां असली भारतीय नागरिकों के नाम शामिल करने के लिए 1951 के बाद एनआरसी को अपडेट किया जा रहा है। जो लोग असम में बांग्लादेश बनने के पहले (25 मार्च 1971 के पहले) आए है, केवल उन्हें ही भारत का नागरिक माना जाएगा।

 

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर सबसे पहले वर्ष 1951 में तैयार किया गया था ।

1979 में अखिल आसाम छात्र संघ  द्वारा अवैध आप्रवासियों की पहचान और निर्वासन की मांग करते हुए एक 6 वर्षीय आन्दोलन चलाया गया था।

15 अगस्त, 1985 को असम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अखिल असम छात्रसंघ का आन्दोलन शान्त हुआ था।

असम में बांग्लादेशियों की बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर नागरिक सत्यापन की प्रक्रिया दिसंबर, 2013 में शुरू हुई थी। मई, 2015 में असम राज्य के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे।

31 दिसंबर, 2017 को असम सरकार द्वारा राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टरयानी एनसीआर का पहला संस्करण जारी किया गया।

भारतीय नागरिक के रूप में मान्यता प्रदान किए जाने हेतु 3.29 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 1.9 करोड़ लोगों को वैध भारतीय नागरिक माना गया है। शेष 1.39 करोड़ आवेदनों की विभिन्न स्तरों पर जांच जारी थी।

राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का बहु-प्रतीक्षित दूसरा एवं आखिरी मसौदा 2.9 करोड़ नामों के साथ हाल ही में जारी किया गया।

एनआरसी में शामिल होने के लिए असम में 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन दिया था। भारतीय महापंजीयक शैलेश के अनुसार कहा कि इस ऐतिहासिक दस्तावेज में 40.07 लाख आवेदकों को जगह नहीं मिली है। यह ऐतिहासिक दस्तावेजअसम का निवासी होने का प्रमाण पत्र होगा।

एनआरसी जारी होने के बाद हुए विवाद को देखते हुए कानून व्यवस्था का खतरा उत्पन्न हो गया है। इसके मद्देनजर एहतियातन राज्य के सभी 33 जिलों में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेद्याज्ञा लागू कर दी गई है।

राज्य में सभी एनआरसी सेवा केंद्रों में अंतिम मसौदा उपलब्ध है।

करीब 40.07 लाख आवदेकों को शामिल ना किए जाने पर सरकार का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार यह प्रक्रिया पूरी की गई है। फिर भी  

 सूची में शामिल होने के लिए फिर से आवेदन लोग कर सकेंगे। मसौदे के संबंध में दावा और आपत्ति जताने की प्रक्रिया 30 अगस्त से शुरू होगी और 28 सितंबर तक चलेगी। लोगों को आपत्ति जताने की पूर्ण एवं पर्याप्त गुंजाइश दी जाएगी। किसी भी वास्तविक भारतीय नागरिक को डरने की जरूरत नहीं है।

 

किसी के भी खिलाफ कोई बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसलिए किसी को भी घबराने की जरुरत नहीं है।सिंह ने कहा कि अगर किसी का नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं है तो वह विदेशी न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग अनावश्यक रूप से डर का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह पूरी तरह से निष्पक्ष रिपोर्ट है। कोई भी गलत सूचना नहीं फैलानी चाहिए। यह एक मसौदा है ना कि अंतिम सूची।असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोगों को बधाई देते हुए कहा, ‘‘यह ऐतिहासिक दिन हमेशा लोगों की यादों में रहेगा।’   

प्रक्रिया में शामिल 55,000 अधिकारियों और बराक तथा ब्रह्मपुत्र घाटियों, मैदानों और राज्य की पहाडियों पर रहने वाले लोगों को हार्दिक बधाई देता हूं।

मुख्यमंत्री ने लोगों से साम्प्रदायिक और उकसावेवाली टिप्पणियां करने से बचने की भी अपील की। असम के साथ सीमा साझा करने वाले कई पूर्वोत्तर राज्यों ने अवैध प्रवासियों की संभावित घुसपैठ को विफल करने के लिए अपने- अपने पुलिस बलों को अलर्ट कर दिया है। केंद्र ने असम और उसके पड़ोसी राज्यों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 220 टुकडियों को भेजा है।    

 

 

विक्रम उपाध्याय बिग वायर हिंदी के संपादक हैं