शिबिरों में हुए शस्त्र प्रशिक्षण आत्मरक्षा के लिए: बिएचपी

 

Bajrang-Dal

Pic: Jansatta

नईदिल्ली  से  बिक्रम उपाध्याय

नईदिल्ली (बिग वायर) कुछ दिन पहले बजरंग दल के शिबिरों में हुए शस्त्र प्रशिक्षण और उसमें टोपी पहनने बाला एक ब्यक्ति को आंतकवाद के प्रतीक बनाकर युद्ध लड़ने की घटनाओं पर राजनीति बेहद गरम है।

उत्तरप्रदेश की सरकार ने बजरंग दल के कुछ कार्यकर्त्ताओं को गिरफ्तार कर इस मामले को और तूल दे दिया है। इस मुद्दे पर बिश्व हिंदू परिषद के अखिल भारतीय मंत्री व धर्माचार्य संपर्क प्रमुख श्री अशोक तिवारी से बातचीत।

शस्त्र का प्रशिक्षण

ashok tiwari

अशोक तिवारी

प्रश्न: बजरंग दल अपने शिबिरों में शस्त्र का प्रशिक्षण क्यों दे रहा है?

बजरंग दल शस्त्र प्रशिक्षण नहीं देता। एयर गन से कोई प्रशिक्षण होता भी है तो इस दृश्टि से की यदि कोई आबश्यकता पड़े और ऐसी कोई परिस्थितियां बन जाए तो उसे किसी का मुंह ना देखना पड़े कि कैसे इसका संचालन करें।

कई बार सामाजिक जीवन में परिस्थितियां आती रहती हैं। बजरंग दल केवल इतना करता है कि कार्यकर्त्ताओं का आत्मबिस्वाश बना रहे।

प्रश्न: लेकिन जो तस्वीरे आई हैं उसमे सिर पर टोपी पहने व्यक्ति को लक्ष्य बनाया जा रहा है?

देखिए कल्पना तरह तरह की होती है । किसी ने किसी को टोपी पहना दी। लेकिन मैं आपसे प्रश्न करू कि आज तक जितने आतंकवादी पकड़े गए, मारे गए या सामने आए उनमें से कौन टोपी वाला नहीं था।

यदि बजरंग दल ने किसी आंतकवादी के प्रतीक को टोपी पहना दी तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ा।

प्रश्न: लेकिन यह बात तो भारतीय मुसलमानों के लिए कहना तो ठीक नहीं है?

नहीं नहीं क्यों नहीं! आखिर भारत के अंदर उनकों पनाह देने वाले कौन से लोग है? कितने मदरसों ने इन्हें पनाह दी है। कितने मदरसे पकड़े गए इसमें। सब आतंकवादी आते हैं, किसी न किसी मदरसे में ही ठहरते हैं।

किसी न किसी मस्जिद में ही उनकी पनाहगाह होती है। कैसे कह सकते हैं कुछ भारतीय मुसलमान इसमें सामिल नहीं है। यदि भारतीय मुसलमान इस बात को चाह ले कि हमको आतंवाद मिटाना है तो दो दिन के अंदर भारत से आतंकवाद समाप्त हो जाएगा।

केवल भारतीय मुसलमान उनको मस्जिदों और मदरसों में पनाह देना बंद कर दें।

प्रश्न: यदि आपका प्रशिक्षण सिर्फ आत्मरक्षा के लिए है तो फिर गिरफ्तारियां क्यों हो रही हैं?

अब ये तो उत्तरप्रदेश राज्य सरकार की तुष्टिकरण की नीति है। आगे २०१७ में चुनाव होने वाले हैं। पूरे देश के अदंर आज से नहीं, जब से बजरंग दल की स्थापना हुई उसके पांच – सात साल बाद से बजरंग दलको इनलोगोंने निशाना बनाया है।

इन दिनों हमारे बजरंग दल के प्रांतीय वर्ग चलते हैं और पूरे देश में कम से कम ऐसे ४० वर्ग चलते हैं। इस समय गिरफतारियां सिर्फ उत्तरप्रदेश में क्यों हो रही है?

उत्तरप्रदेष में इसलिए कि सपा सरकार को मुसलमानों को संतुश्ट करना है, २०१७ में चुनाव आ रहा हैं। वोट कैसे बनाया जाए, कैसे बढ़ाया जाए। इसके लिए वे कर रहे है। यह सपा सरकार की पॉलिसी है। और किसी प्रांत में कुछ नहीं हुआ।

उत्तरप्रदेश चुनाव

प्रश्न: आरोप तो यह भी लग रहा है कि बजरंग दल भी चुनाव को देखकर ही माहौल खराब करने में लगा है?

हमारा यह निश्चित प्रोग्राम है। हर बर्ष का प्रोग्राम है। हम कोई माहौल खराब करना नहीं चाहते। हमारे बारे में दुष्प्रचार में कुछ मीडिया के लोग भी मिल जाते हैं। विदेशी धन पर जो बड़े बड़े मीडिया हाउस चल रहे हैं वे हमारे खिलाफ उस शडयंत्र में सामिल हैं।

प्रश्न: क्या इन घटनाओं से मोदी की इमेज को धक्का नहीं पहुंचता है? कहां जाता है कि संघ परिवार के कुछ लोग ही मोदी की इमेज खराब कर रहे हैं?

इससे किसी भी इमेज को धक्का नहीं पहुंचता और न किसी की इमेज बिल्डअप होती है। हमारा बिशुद्ध संगठनात्मक कार्यक्रम है।

हम ना तो किसी की इमेज को गिराने के लिए काम करते हैं और ना किसी की इमेज बढ़ाने का काम करते हैं। हम अपना संगठनात्मक काम करते हैं।

हमारा संगठन कैसे मजबूत हो, हमारा तंत्र कैसे मजबूत हो और हमारे कार्यकर्त्ता में कैसे आत्मबिश्वास बढ़े हम उसके लिए काम करते हैं।

प्रश्न: उत्तरप्रदेश के चुनाव में विहिप क्या भूमिका निभाने वाली है?

हमारा किसी भी चुनाव में कोई भूमिका नहीं होती। हमारी भूमिका केवल हिंदुत्व की होती है। अगर कोई हिंदुत्व की बात आएगी, हिंदुत्व का मुद्दा आएगा। हमारे पास कोई वोट मांगने आएगा, हमारा जो समर्थन मांगेगां उनको हम कहेंगे कि भाई आपके मेनिफेस्टों में हिंदुत्व की बाते क्या क्या है।

उसके आधार पर तुलनात्मक अध्ययन करके जो हिंदुत्व के ज्यादा नजदीक होगा हम उसको अपना समर्थन देंगे।

रामजन्मभूमि का मुद्दा

प्रश्न : लेकिन भाजपा तो रामजन्मभूमि का मुद्दा कोर्ट के जरिये ही निपटाने की बात कर रही है? क्या बिश्व हिन्दू परिषद सरकार की बात मानकर चुपचाप बैठ जाएगी?

नहीं बिश्व हिन्दू परिषद कभी भी चुपचाप नहीं बैठी है। ७ अक्टूबर १९८४ को जिस दिन वहां ताला खोलने का तथा सरयू का जल लेकर संकल्प किया तब से बिश्व हिन्दू परिषद का यह मानना था कि यह न्याय का मामला नहीं है। आस्थाओं का सवाल है।

किसी की भी श्रद्धा को न्यायालय के तराजू में नहीं तौल सकते और दुनिया अनादि काल से कह रही है कि यही राम जन्मभूमि है। यह अलग बात है कि १९८४ से अब तक हमने ंजितनी बाते कहीं न्यायालय सबको मान लिया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीनों जज दो हिंदू और एक मुस्लिम जज ने कहा कि यह कोई हिंदू भवन था जिसको तोड़कर उसके मलवे से बाबरी ढांचा बनाया गया था।

अब हमारे मार्गदर्शक मंडल ने तय किया है कि जब हमने रामजन्म भूमि विवाद को हल करने के लिए बिश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर और नरसिंह राव को समय दिया तो फिर प्रधानमंत्री मोदी को भी कुछ समय दिया जाना चाहिए।

हमारा अब भी यही कहना है कि जैसे संसद ने सोमनाथ मंदिर के निर्माण के लिए कानून बनाया वेसे ही अयोध्या में रामलला के मंदिर निर्माण का भी कानून बनना चाहिए।

बिग वायर

विक्रम उपाध्याय बिग वायर हिंदी के संपादक हैं