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आने वाले चार महीने महंगाई के

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विक्रम उपाध्याय

लाल टमाटर ने महंगाई का ऐसा स्वाद चखाया कि लोगों के मुंह के स्वाद खटटे के बजाय कसैले हो गए।

दो महीने में 20 रुपये से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंचे टमाटर के दाम ने एक बार सरकार को भी चौकन्ना कर दिया और आनन फानन में दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई चेन्नई और बंगलोर में टमाटर की आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकारी एजेंसियों को तैनात कर दिया गया।

लेकिन क्या सरकार यह दावा कर सकती है कि आगे किसी और चीज की कीमत अनायास नहीं बढ़ेगी। संभवतः नहीं।

केंद्र और राज्य सरकारें सजग होती तो टमाटर मंहगा न बिकता और प्याज मारा मारा न फिरता। सरकार का उत्पादन पर तो कोई नियंत्रण नहीं है, लेकिन आपूर्ति को लेकर भी राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच ब्लेम गेम होता रहा तो सटोरिये और जमाखोर मजा लेंगे ही।

आशंका है कि आने वाले चार महीने महंगाई के ही रहने वाले हैं, क्योंकि सूखे के बाद देश की आधी आबादी बाढ़ की विभीषका से जूझेगी और महंगाई के एजेंट ऐसे में अपना मुनाफा जम कर वसूलेंगे।

बहरहाल बाजार में इस समय टमाटर, दाल, आलू चीनी, मछली, हरी सब्जियां और दूध के दाम बढ़ चुके हैं। अर्थशास्त्र के नजरिये से देखे तो भारत का थोकमूल्य सूचकांक और खुदरा मूल्य सूचकांक दोनों बढ़े हुए है।

मई 2016 में थोक मूल्य सूचकांक में 0.42 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह लगातार दूसरे महीने वृद्धि थी। इसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों की कीमत में लगातार बढ़ोतरी है। खुदरा मूल्य सूचकांक की बात करे तो मई में इसमें 5.76 फीसदी की वृद्धि हुई है।

अगस्त 2014 के बाद यह सबसे अधिक वृद्धि है। अकेले खाद्य मुद्रा स्फीति की दर 7.55 फीसदी है। मुद्रा स्फीति के आकड़े बताते हैं कि महंगाई बढ़ाने में सबसे अधिक दाल की कीमत, फिर चीनी और सब्जियांे की कीमत में भारी उछाल प्रमुख कारण रहे हैं।

टमाटर ही नहीं आने वाले दो तीन महीने में सब्जियों की भारी किल्लत होने वाली है। खरीफ की बुवाई तक सब्जियों के खेत खाली हो जाएंगे और नीचे के क्षेत्र में पानी जमा होगा जहां से मंडियों तक सब्जियों का लाना आसान नहीं होगा।

इसलिए आलू पर ज्यादा दारोमदार होगा और जाहिर है कि इसकी कीमत पांच रुपये तक प्रति किलो बढ़ जाएगीं। आलू अभी से ही लगभग 22 से 25 रुपये किलो बिक रहा है।

फिलहाल तो प्;याज की उपलब्धता टेलमठेल है, लेकिन सितंबर, अक्टूबर महीने से लेकर दशहरे के बाद तक प्याज की मांग अचानक बढेगी और आपूर्ति कम होते ही कीमत बढ़ जाएगी।

चूंकि प्याज की नई फसल दिसंबर तक ही बाजार में आएगी तब तक प्याजउ के लिए पैसे देने में आंसू निकालेगा ही।

सरकार ने चीनी के दाम पर अंकुश लगाने के लिए निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है, जिससे चीनी मिल मालिकों को नुकसान होने की आशंका है और जाहिर है कि इससे किसानों के गन्ने के भुगतान पर असर पड़ेगा और इससे ग्रामीण बाजारों पर असर पड़ेगा।

चीनी के साथ ही दाल और तेलों के दाम पर भी दबाव होगा। हालांकि सरकार ने लगभग दस हजार टन दालो का आयात किया है, लेकिन मांग और आपूर्ति के बीच खाई को पांटने के लिए दस लाख टन दाल के आयात की जरूरत है।

यही कारण है कि सरकार के लाख दावे के बावजूद दालों की कीमत में कमी नहीं आ रही है और अरहर की दाल अब भी 170 रुपये किलो के आस पास ही बिक रही है।

कुछ महीने पहले तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 30 डॉलर प्रति बैरेल से भी नीचे आ गया था, जिससे भारत को काफी राहत मिली थी।

भारत ने न सिर्फ सस्ते तेल के कारण मुद्रा स्फीति को काबू में रखा था, बल्कि भुगतान संतुलन को भी अपने पक्ष में करने में सफल रहा था। लेकिन अब तेल के दाम बढ़ रहे हैं।

इस समय कच्चे तेल की कीमत 48 डॉलर से 50 डॉलर के बीच चल रही है, यदि यह और बढ़ी तो न सिर्फ महंगाई बेतहाशा बढ़ेगी, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर पड़ेगा।

पेट्रोलियम पदार्थों के महंगे होने की कीमत सिर्फ जनता ही नहीं चुकाएगी, बल्कि सरकार को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

अभी तक सरकार ने कच्चे तेल के गिरते दामों का फायदा उठाते हुए बिक्री कर और उत्पाद शुल्क में लगातार वृद्धि कर सरकारी खजानों को दुरूस्त किया, लेकिन यदि तेल के दाम बढ़े तो सरकार को उत्पाद शुल्क और वैट दोनों को कम करना पड़ेगा और अपने लिए आय का कोई और विकल्प सोंचना होगा।

वित्त मंत्रालय का भी मानना है कि अगले मार्च तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 5.0 डॉलर प्रति बैरेल से अधिक ही रहने की संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह तकलीफ की घड़ी होगी।

तमाम उत्साहवर्द्धक नारों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। बैंकिग, निर्माण और निर्यात क्षेत्र में काफी दिक्कते हैं।

यदि महंगाई भी बेकाबू रहती है तो यह स्थिति कोढ़ में खाज की हो जाएगी। एक तिहाई आबादी अभी सूखे से निपटने में लगी है।

लोगों की आय दिन प्रति दिन कम होती जा रही है और उपर से कीमत वृद्धि के कारण रोटी दाल भी नसीब ना हो स्थिति विस्फोटक हो जाएगी। प्रधानमंत्री जरूर सजग होंगे।

bikram

विक्रम उपाध्याय बिग वायर हिंदी के संपादक हैं । इस लेख में दिए गए बिचार उनके निजस्व हैं ।

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