ऐसे बनी राज्य सभा




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Pic: Rajya Sabha website

बिग वायर नई दिल्ली ब्यूरो

वैसे तो पहली राज्यसभा का गठन ३ अप्रैल १९५२ को हुई थी , लेकिन इसकी नीव १९१९ में ही पड़ गयी थी जब मोंटेग चेम्सफोर्ड रिपोर्ट लागू की गयी थी। तब इसका नाम सेकंड चैम्बर ऑफ़ पार्लियामेंट रखा गया था।

उस समय महिलाओ को न तो इसके लिए उम्मीदवार बनने की इजाजत थी और न वोट डालने का अधिकार था। उस समय इसे ब्रिटिश गवर्नमेंट चैम्बर भी कहा गया क्योकि अंग्रेजों ने इसका गठन अपने हितो को कानूनी जामा पहनाने के लिए किया था।

स्वतंत्र भारत में २३ अगस्त १९५४ को राज्य सभा मौजुदा स्वरुप में आयी। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन इसके पहले चेयरमैन बने। तभी से उप राष्ट्रपति ही राज्य सभा के चेयरमैन होते है । आज राज्यसभा हमारी संसदीय व्यवस्था की प्रमुख इकाई है।

संविधान में राज्यसभा के सदस्यों की कुल संख्या २५० रखी गयी है, पर मौजूदा समय में इसके २४५ सदस्य हैं। राज्य सभा के सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है। इसे हम कौंसिल ऑफ़ स्टेट भी कह सकते हैं , क्योकि इसका प्रतिनिधित्व देश के सभी राज्य करते है।

जनसँख्या और भूगोल के अनुसार सभी राज्यों को एक निशिचत संख्या में सदस्यों को इस उच्च सदन में भेजने का अधिकार है। सबसे अधिक् उत्तरप्रदेश से ३१ राज्य सभा सदस्य चुने जाते है , उसके बाद १९ महाराष्ट्र से, १८ तमिलनाडु से और १६ सदस्य बंगाल से चुन कर आते है।

राष्ट्रपति विभिन्न क्षेत्रों के १२ प्रमुख लोगों को नामित भी करते हैं। वैसे राज्यसभा का चुनाव राज्य विधान सभा के चुने हुए सदस्य सीधे मतदान के जरिये करते हैं। राज्य सभा हमारी लोकतंत्रीय व्यवस्था की एक बेहद महत्वपूर्ण इकाई है।

यहाँ न सिर्फ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है, बल्कि देश के लिए कानून बनाने में भी इस सभा का योगदान लोक सभा के बराबर ही है। संविधान में बर्णित मनी बिल को छोड़ कर किसी भी विधेयक को बिना राज्य सभा से पास कराये कानून का रूप नहीं दे सकते।

राज्य सभा को अपर हाउस भी कहते हैं। ऐसा शायद इसलिए कि यह सदन लोक सभा में संख्या के बल पर कोई पार्टी मनमानी न कर सके। पहली राज्यसभा के २१६ सदस्य थे। रुक्मणि देवी पहिला नामित सदस्य बनीं।

डॉक्टर एस राधाकृष्णन पहले चेयरमैन और एस वी कृष्णामूर्ति डिप्टी चेयरमैन बने। एन गोपालस्वामी इयांगर लीडर ऑफ़ दी हाउस चुने गये। वैसे तो राज्यसभा के सदस्य किसी भी मंतिमंडल के स्थाई सदस्य हो सकते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में भी दो राज्यसभा सदस्यों ने देश की सेवा की ।

एक इंदिरा गांधी  जिन्हें लालबहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया और दूसरे मनमोहन सिंह जिन्होंने लगातार दस वर्षों तक राज्यसभा सदस्य के रूप में ही प्रधानमंत्री का पद सम्हाला।

डॉ जाकिर हुसैन ( शिक्षाविद् ), प्रो सत्येंद्रनाथ बोस (वैज्ञानिक ) – काका साहेब कालेलकर (विद्वान) , श्री मैथिलीशरण गुप्त (कवि), श्री पृथ्वीराज कपूर ( कलाकार) श्री हबीब तनवीर (कलाकार), श्री कृष्ण कृपलानी (लेखक), नरगिस दत्त (कलाकार) – श्री खुशवंत सिंह (पत्रकार) – अमृता प्रीतम (साहित्यकार) श्री एम एफ हुसैन (कलाकार) श्री आर के नारायण (साहित्यकार) पं रविशंकर (कलाकार) श्री जगमोहन (प्रशासक).

श्री प्रकाश यशवंत अंबेडकर (सामाजिक कार्यकर्ता) श्रीमती वैजयन्ती माला बाली (कलाकार) – श्री मृणाल सेन (फिल्म निर्माता) – श्रीमती शबाना आजमी (कलाकार) – श्री कुलदीप नैयर (पत्रकार) श्री नाना देशमुख (सामाजिक कार्यकर्ता) -सुश्री लता मंगेशकर (कलाकार) – श्री फली एस नरीमन (वरिष्ठ अधिवक्ता) – श्री बिमल जालान (अर्थशास्त्री) – श्री दारा सिंह (खिलाड़ी और कलाकार) – श्रीमती हेमा मालिनी (कलाकार) – श्री श्याम बेनेगल (कलाकार) –पूर्व में और रेखा, सचिन तेन्दुलकर, नवजोत सिद्धू जैसी हस्तियां राज्यसभा की शोभा बढ़ा चुकी हैं।

बिग बायर